سحر
/vâže/
فرهنگ فارسی معین
(سَ حَ) [ ع. ] (اِ.)پیش از صبح، سپیده - دم.
(س) [ ع. ] ۱- (مص ل.) جادو کردن. ۲- (اِمص.) جادوگری. ۳- (اِ.) جادو. ۴- هر آن چه که در آن فریبندگی و گیرندگی خاص باشد.
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فرهنگ فارسی معین
(سَ حَ) [ ع. ] (اِ.)پیش از صبح، سپیده - دم.
(س) [ ع. ] ۱- (مص ل.) جادو کردن. ۲- (اِمص.) جادوگری. ۳- (اِ.) جادو. ۴- هر آن چه که در آن فریبندگی و گیرندگی خاص باشد.